प्रेम छंद
सोलह सृंगार करे रति ठाड़ी, लाज को भान रहे न रहे,,
मौन कि भाषा को समझो रे, अधरन से है कहे न कहे,,
भाव के पुश्प चढ़े मनमंदिर, प्रेम से पावक प्राण हुए,,
प्रेम बना पूजा तब जाके, प्रेम में राधा कृष्ण बने,,
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ज्ञान औ मुक्ती मार्ग बताने , उद्धो आए हैं बरसाने,,
अश्रु बहाओ न कृष्ण विरह मे, कृष्ण न लौट के आबन बारे,,
लागत कछु न सूजे उद्धो , संग हमारे खड़े हैं कन्हाई,,
हस बोली ये गोप कुमारी, उद्धो के मन विस्मय भरी ,,
देख प्रेम की अद्भुत लीला , उद्धो मन मे है हरसाने,
जय राधा जय जय श्री राधा, गोपाल राधा लगे हैं गाने,,
Gopal Gupta "Gopal"
HARSHADA GOSAVI
01-Aug-2023 06:37 PM
Very nice
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Gopal Gupta
01-Aug-2023 07:39 PM
दिल से आभार आप का
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